भारत-कनाडा रिश्तों में नई शुरुआत: आखिर क्यों अचानक भारत के करीब आ रहा है कनाडा?

भारत कनाडा व्यापार समझौता: क्यों भारत पर बड़ा दांव लगा रहा है कनाडा?

ओटावा, कनाडा: भारत और कनाडा के रिश्ते अब सिर्फ पुराने तनाव से बाहर निकलने की कोशिश नहीं कर रहे, बल्कि दोनों देश एक बड़े आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी मॉडल की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि अब कनाडा खुलकर भारत को अपनी लंबी अवधि की आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा मानने लगा है।

हाल ही में कनाडा की राजधानी ओटावा में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों में आए बड़े बदलाव का संकेत दिया। इस दौरान भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी CEPA को लेकर तेज बातचीत हुई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस समझौते को “गेम चेंजर” तक बता दिया।

आखिर क्या है CEPA समझौता?

CEPA यानी Comprehensive Economic Partnership Agreement एक बड़ा व्यापारिक समझौता होता है। इसके तहत दो देश व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी और कई आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाते हैं। आसान भाषा में समझें तो इससे दोनों देशों के कारोबारियों को नए अवसर मिलते हैं और व्यापार करना आसान हो जाता है।

भारत और कनाडा फिलहाल इसी समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों का लक्ष्य है कि 2026 तक बातचीत पूरी कर ली जाए।

भारत ने भेजा अब तक का सबसे बड़ा बिजनेस डेलिगेशन

इस बार भारत सिर्फ सरकारी प्रतिनिधियों के साथ नहीं पहुंचा। भारत ने 100 से ज्यादा कंपनियों का अब तक का सबसे बड़ा बिजनेस डेलिगेशन कनाडा भेजा। इसमें AI, माइनिंग, ऊर्जा, टेलीकॉम, फार्मा, ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियां शामिल थीं।

इससे साफ संकेत मिला कि भारत और कनाडा अब केवल कूटनीतिक बातचीत नहीं, बल्कि लंबी आर्थिक साझेदारी की तैयारी कर रहे हैं।

कनाडा अचानक भारत के करीब क्यों आ रहा है?

असल में इसके पीछे सबसे बड़ा कारण चीन है।

पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका और चीन के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। कोविड महामारी के बाद दुनिया ने यह भी देखा कि किसी एक देश पर ज्यादा निर्भरता कितनी जोखिम भरी हो सकती है। अब कई पश्चिमी देश चीन पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करना चाहते हैं।

कनाडा भी इसी रणनीति पर काम कर रहा है। उसे एशिया में ऐसा मजबूत साझेदार चाहिए जो आर्थिक रूप से तेजी से बढ़ रहा हो, राजनीतिक रूप से स्थिर हो और पश्चिमी देशों के साथ सहयोग करने को तैयार हो। भारत इन सभी शर्तों पर फिट बैठता है।

भारत की विशाल आबादी, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता ने कनाडा का ध्यान खींचा है।

किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा फोकस?

भारत कनाडा व्यापार समझौता पर आधारित हिंदी infographic, जिसमें AI, क्रिटिकल मिनरल्स, रिन्यूएबल एनर्जी, फार्मास्युटिकल्स, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि-फूड प्रोसेसिंग जैसे प्रमुख सेक्टर दिखाए गए हैं।
भारत-कनाडा आर्थिक रिश्तों में नई शुरुआत। AI, क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे भविष्य के सेक्टर अब दोनों देशों के सहयोग का केंद्र बन रहे हैं।

भारत और कनाडा की बातचीत सिर्फ सामान्य व्यापार तक सीमित नहीं रही। दोनों देशों ने भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े सेक्टरों पर खास जोर दिया।

इनमें शामिल हैं:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  • क्रिटिकल मिनरल्स
  • रिन्यूएबल एनर्जी
  • फार्मास्युटिकल्स
  • एडवांस मैन्युफैक्चरिंग
  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
  • कृषि और फूड प्रोसेसिंग

दरअसल, आने वाले वर्षों में यही सेक्टर वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे। ऐसे में दोनों देश खुद को भविष्य के आर्थिक साझेदार के रूप में तैयार कर रहे हैं।

भारत को क्या फायदा होगा?

भारत के लिए यह समझौता बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर CEPA सफल होता है तो भारतीय कंपनियों को कनाडा के बाजार में ज्यादा आसान पहुंच मिल सकती है। इससे निवेश बढ़ सकता है और भारत को पश्चिमी देशों के लिए भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग हब बनने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, भारत को नई टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में भी फायदा मिल सकता है। यह वही सेक्टर हैं जिन पर भारत अगले दशक में वैश्विक शक्ति बनने की रणनीति बना रहा है।

व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य

फिलहाल भारत और कनाडा के बीच व्यापार करीब 8.5 अरब डॉलर का है। लेकिन दोनों देशों ने इसे 2030 तक बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

अगर यह लक्ष्य पूरा होता है तो यह भारत और किसी G7 देश के बीच सबसे तेजी से बढ़ने वाले व्यापारिक संबंधों में शामिल हो सकता है।

क्यों अहम है यह पूरा घटनाक्रम?

भारत-कनाडा संबंधों में यह बदलाव सिर्फ व्यापार की कहानी नहीं है। इसके पीछे बदलती वैश्विक राजनीति भी है।

आज पश्चिमी देश चीन के विकल्प की तलाश में हैं और भारत तेजी से उस खाली जगह को भरता दिख रहा है। यही वजह है कि कनाडा जैसे देश अब भारत को केवल बाजार नहीं, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की आर्थिक स्थिरता का अहम स्तंभ मानने लगे हैं।

यानी साफ है कि भारत और कनाडा के रिश्तों में यह नई शुरुआत आने वाले वर्षों में सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।



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