नई दिल्ली/मस्कट, 11 जून 2026:
खाड़ी क्षेत्र और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी गंभीर सैन्य तनाव के बीच एक बड़ा और दुखद हादसा सामने आया है। ओमान के सोहार तट से लगभग 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में पलाऊ-ध्वज वाले मध्यम दूरी के तेल टैंकर ‘एमटी सेटेबेलो‘ (MT Settebello) पर अमेरिकी नौसेना बलों द्वारा की गई सीधी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है। इस घटना के बाद भारत सरकार ने खाड़ी क्षेत्र और ओमान की खाड़ी में देश के समुद्री हितों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर अपनी सभी संबंधित सुरक्षा व राजनयिक एजेंसियों को ‘हाई अलर्ट’ पर रहने का निर्देश दिया है।
अमेरिकी नाकेबंदी और इंजन रूम पर हमला
यह घटना 9 जून 2026 की रात को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस टैंकर ने 13 अप्रैल 2026 से ईरान पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन किया था। CENTCOM का दावा है कि जहाज को रोकने और मार्ग बदलने के बार-बार दिए गए निर्देशों का पालन न करने पर, अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन रूम पर सटीक निशाना साधकर युद्धक सामग्री से हमला किया।
इस जहाज पर कुल 28 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें से 24 भारतीय नागरिक थे। ओमान की नौसेना और समुद्री सुरक्षा केंद्र ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 21 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया। हालांकि, इस हमले में तीन भारतीय नाविकों—चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश, इंजन फिटर शिवानंद चौरसिया और डेक कैडेट आदित्य शर्मा—की दुखद मृत्यु हो गई। उनके पार्थिव शरीरों की पहचान कर ली गई है।
भारत की कड़ी राजनयिक प्रतिक्रिया और विरोध
इस घातक हमले ने नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच राजनयिक तनाव को बढ़ा दिया है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत (Charge d’Affaires) जेसन मीक्स को तलब कर इस घटना पर कड़ा राजनयिक विरोध (Demarche) दर्ज कराया है। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि नागरिक वाणिज्यिक जहाजों को इस तरह से निशाना बनाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में निर्दोष नाविकों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।
दूसरी ओर, ‘फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया’ (FSUI) जैसे समुद्री श्रम संगठनों ने भी इस अमेरिकी कार्रवाई की तीखी आलोचना की है। संघ के नेताओं का कहना है कि निहत्थे व्यापारिक जहाजों के इंजन रूम जैसे अत्यधिक ज्वलनशील हिस्से पर सीधे मिसाइल या बम दागना नागरिक कर्मियों के जीवन को सीधे तौर पर मौत के मुंह में धकेलना है, चाहे जहाज की अनुपालन स्थिति कुछ भी हो।
सरकारी कदम और पीड़ित परिवारों को सहायता
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा:
“सरकार खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और हर एक भारतीय नाविक की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सभी संबंधित मंत्रालय, सुरक्षा एजेंसियां और विदेश स्थित भारतीय मिशन आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।”
मंत्रालय ने पोत परिवहन महानिदेशालय (DGS) को निर्देश दिया है कि बचाए गए नाविकों की जल्द से जल्द वतन वापसी और मृतकों के पार्थिव शरीरों को सम्मानपूर्वक उनके परिवारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया को तेज किया जाए। महानिदेशालय के तहत कार्यरत ‘सीफर्स वेलफेयर फंड सोसाइटी’ (SWFS) ने मृतकों के परिवारों के लिए तत्काल 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता राशि जारी करने की घोषणा की है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर
अंतरराष्ट्रीय समुद्री विश्लेषकों के अनुसार, इस हमले के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों का युद्ध जोखिम बीमा प्रीमियम (War Risk Insurance Premium) अचानक बढ़ गया है। कई भारतीय शिपिंग कंपनियों ने अब इस क्षेत्र में अपने जहाजों के परिचालन समय और रूट में बदलाव करना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की आशंका गहरा गई है।
