नीस (फ्रांस): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फ्रांस दौरा शुरू हो चुका है।मोदी के खूबसूरत शहर नीस (Nice) पहुंचने के साथ ही भारत और फ्रांस के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ होने वाली उच्चस्तरीय वार्ता केवल डिफेंस, AI, तकनीक और सह-उत्पादन के एक नए युग का शंखनाद है।
यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी ‘खरीददार और विक्रेता’ के रिश्ते से आगे बढ़कर संयुक्त उत्पादन और नवाचार (Innovation) आधारित साझेदारी में बदल चुकी है।
1. भारत-फ्रांस रक्षा समझौता:’बायर्स’ से ‘को-प्रोड्यूसर’ बनने का सफर
रक्षा क्षेत्र हमेशा से भारत-फ्रांस संबंधों की सबसे मजबूत रीढ़ रहा है। साल 1998 में शुरू हुई इस रणनीतिक साझेदारी ने अब एक नया रूप ले लिया है:
- 10 साल का नया रोडमैप: फरवरी 2026 में आयोजित छठे वार्षिक रक्षा संवाद के दौरान दोनों देशों ने अपने रक्षा सहयोग समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ा दिया है। इसके तहत सैन्य अधिकारियों की पारस्परिक तैनाती को भी विस्तार दिया गया है।
- तकनीक का हस्तांतरण (Tech Transfer): भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-एम (Rafale-M) लड़ाकू विमानों का समझौता केवल विमान खरीदने तक सीमित नहीं है। इसमें बड़े स्तर पर तकनीकी हस्तांतरण, स्वदेशी हथियारों का एकीकरण और भारत में ही इसके मेंटेनेंस हब की स्थापना शामिल है।
- मेक इन इंडिया को रफ्तार: फ्रांसीसी एयरोस्पेस दिग्गज सफरान (Safran) द्वारा भारत में इंजन रखरखाव सुविधाओं और रक्षा औद्योगिक साझेदारियों का विस्तार करना यह साफ दिखाता है कि फ्रांस अब भारत को अपनी आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता विकसित करने में बड़ा साझेदार मानता है।
2. पीएम मोदी का फ्रांस दौरा कितना अहम ?
फ्रांस दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से है, जिसने हमेशा भारत के संप्रभु फैसलों और उसकी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का बिना शर्त समर्थन किया है। इस बैठक में मुख्य फोकस इन रणनीतिक क्षेत्रों पर रहेगा:
- रणनीतिक समीक्षा: दोनों नेता रक्षा, अंतरिक्ष (Space), परमाणु ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा समीकरणों की समीक्षा करेंगे।
- भविष्य की तकनीक: वार्ता के एजेंडे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्लीन एनर्जी, साइबर सुरक्षा और उन्नत औद्योगिक निवेश जैसे भविष्य के विषय सबसे ऊपर हैं।
- G7 समिट: इस दौरे के दौरान पीएम मोदी G7 शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे, जहां वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक मुद्दों पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।
3. ‘भारत इनोवेट्स’: वैश्विक पूंजी और भारतीय स्टार्टअप्स का महासंगम
प्रौद्योगिकी (Technology) अब भारत-फ्रांस संबंधों का दूसरा सबसे बड़ा स्तंभ बन चुकी है। नीस में आयोजित होने वाला “भारत इनोवेट्स” (India Innovates) कार्यक्रम इस दिशा में एक बड़ा कदम है।
- उद्देश्य: इस मंच के जरिए भारतीय स्टार्टअप्स, यूरोपीय निवेशकों और टेक दिग्गजों को एक साथ लाया जा रहा है।
- रणनीति: भारत की कोशिश बिल्कुल साफ है—AI, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और डीप-टेक को अपनी आर्थिक और रणनीतिक ताकत का नया जरिया बनाना और इसमें यूरोपीय देशों की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाना।
4. यूरोप के लिए भारत का ‘गेटवे’ है फ्रांस
बदलते वैश्विक परिवेश में, जहां पूरी दुनिया सुरक्षित सप्लाई चेन (Supply Chain Security) और तकनीकी प्रतिस्पर्धा से जूझ रही है, वहां फ्रांस भारत के लिए यूरोप का सबसे भरोसेमंद प्रवेश द्वार बनकर उभरा है। भारत के लिए फ्रांस उन्नत औद्योगिक क्षमताओं का स्रोत है, तो फ्रांस के लिए भारत एक विशाल, कुशल और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है।
स्लोवाकिया यात्रा: मध्य यूरोप तक पहुंच की नई कूटनीति
फ्रांस के इस ऐतिहासिक दौरे के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया के लिए रवाना होंगे। यह यात्रा भारतीय कूटनीति के लिहाज से बेहद खास है:
- ऐतिहासिक कदम: स्लोवाकिया की आजादी के बाद किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी।
- नया औद्योगिक हब: इस यात्रा के दौरान विनिर्माण (Manufacturing), रेलवे, ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन और औद्योगिक निवेश पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- संदेश: यह कदम दिखाता है कि भारत अब केवल पश्चिमी यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य यूरोप के उभरते औद्योगिक केंद्रों के साथ भी अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत कर रहा है।
निष्कर्ष
आने वाले दिनों में फ्रांस से निकलने वाले रक्षा, एयरोस्पेस और एआई से जुड़े समझौते न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को बढ़ाएंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि आने वाले दो दशकों में वैश्विक पटल पर भारत-फ्रांस की यह जुगलबंदी दुनिया को क्या नई दिशा देने वाली है।
