युद्ध का ‘अदृश्य’ व्यापार: कैसे ‘मेड इन इंडिया’ बारूद पलट रहा है दुनिया के युद्धों का पासा?

अक्सर निवेशक युद्ध के दौरान केवल उन चेहरों को देखते हैं जो सबसे ज्यादा चमकते हैं—जैसे कच्चे तेल की कीमतें, लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनियाँ या कूटनीतिक हलचलें। लेकिन आधुनिक संघर्षों का एक ‘अदृश्य सच’ भी है। युद्ध केवल हेडलाइन्स से नहीं जीते जाते, बल्कि वे गोलों (Shells), प्रणोदकों (Propellants), रॉकेट मोटरों और विस्फोटकों की उस औद्योगिक क्षमता पर टिके होते हैं, जो दुनिया भर में मांग बढ़ने पर अक्सर कम पड़ जाती है।

डिमोना की गूँज और इजराइल का ‘छोटा भारत’: जब नेगेव की रेत में घुली मराठी महक पर मंडराया युद्ध का साया

इजराइल के नेगेव रेगिस्तान की उस भीषण खामोशी में, मृत सागर (Dead Sea) से लगभग 35 किलोमीटर पश्चिम में एक ऐसा शहर बसा है जिसकी कल्पना करना भी कठिन है। इस शहर का नाम है ‘डिमोना’। यहाँ की धूल भरी गलियों में आज भी हिब्रू के बीच मराठी के शब्द तैरते सुनाई देते हैं। तपती दोपहरों में जब खिड़कियों से घर में बने भारतीय मसालों की खुशबू आती है, तो रेगिस्तान का सन्नाटा जैसे किसी भारतीय कस्बे में तब्दील हो जाता है। यह इजराइल का ‘छोटा भारत’ है—’बेने इजराइल’ (Bene Israel) समुदाय का वह आशियाना, जिसकी दास्ताँ सदियों, महाद्वीपों और अब एक सीधे युद्ध के बीच से गुजर रही है।

होर्मुज़ में भारत के जहाज़ क्यों फंसे हैं? आसान भाषा में पूरा समझिए पूरा मामला

TES Explainer 23 मार्च 2026 | By Abhishek Kumar हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में भारत के जहाज़ों की हालत अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कुछ भारतीय जहाज़ जरूर निकल पाए हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि रास्ता फिर से पहले जैसा खुल गया है। सच यह है कि अभी भी कई जहाज़ रुके … Read more

तेल और गैस से लेकर दलाल स्ट्रीट तक….होर्मुज पर बढ़ता संकट कितना ख़तरनाक ?

तेल की कीमतों से लेकर दलाल स्ट्रीट तक असर दिखने लगा है। होर्मुज़ पर बढ़ता तनाव अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है।

Indian Defence Stocks: NATO की गोला-बारूद कमी से कौन सी भारतीय कंपनियां बना सकती हैं बड़ा पैसा?

NATO और पश्चिमी देशों की गोला-बारूद कमी ने दुनिया को एक पुराना सच फिर याद दिलाया है—युद्ध सिर्फ मिसाइलों और लड़ाकू विमानों से नहीं, फैक्ट्रियों से भी लड़े जाते हैं। ऐसे में Indian defence stocks पर नई दिलचस्पी दिख रही है, खासकर उन कंपनियों पर जो ammunition, propellants और energetics supply chain में जगह बना चुकी हैं।