भारत ‘शौर्य NG’ हाइपरसोनिक मिसाइल टेस्ट की तैयारी में
भारत अब सिर्फ लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता नहीं बढ़ा रहा, बल्कि दुश्मन की रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय करने वाली तेज, सटीक और सर्वाइवेबल स्ट्राइक क्षमता पर फोकस कर रहा है।
भारत अब सिर्फ लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता नहीं बढ़ा रहा, बल्कि दुश्मन की रक्षा प्रणाली को निष्क्रिय करने वाली तेज, सटीक और सर्वाइवेबल स्ट्राइक क्षमता पर फोकस कर रहा है।
अब लड़ाई सिर्फ मिसाइलों और फाइटर जेट्स की नहीं है। अब असली ताकत उसके पास होगी, जो दुश्मन को दिखे बिना, उसकी रक्षा-परतों को चीरकर हमला कर सके। भारत ने इसी खेल में अपना नया दांव तैयार किया है—घातक। यह एक स्टील्थ UCAV है, जिसे दुश्मन की सीमा के भीतर गहराई तक जाकर सटीक वार … Read more
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता कितनी असली है? जानिए भारत क्यों दूरी बनाए हुए है, चाबहार, हॉर्मुज और ऊर्जा सुरक्षा पर इसके क्या मायने हैं।
विश्लेषण | The Eastern Strategist Desk पढ़ने का समय: 4 मिनट जब दुनिया ईरान में भड़क रहे युद्ध को सिर्फ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पेट्रोल पंप के मीटर के नजरिए से देख रही है, भारत के लिए यह कहानी कहीं ज्यादा गहरी और बड़ी है। यह सिर्फ ऊर्जा का झटका नहीं है। भू-राजनीति … Read more
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के नाकाम होने के बाद क्या अब अमेरिका ईरान में अपनी सेना उतारने जा रहा है? खार्ग द्वीप पर कब्जे की तैयारी और ज़ाग्रोस पहाड़ों के अभेद्य किलों के बीच, वॉशिंगटन एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसता दिख रहा है जहां से निकलना नामुमकिन हो सकता है। जानिए क्यों यह जमीनी हमला अमेरिका के लिए एक रणनीतिक ‘नर्क’ साबित हो सकता है।
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 94 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार पहुंच गया है। टीवी चैनलों और अखबारों की हेडलाइंस देखकर ऐसा लग रहा है कि इसकी मुख्य वजह 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुका कच्चा तेल (Crude Oil) और ईरान का युद्ध है।
संक्षिप्त सार: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की कोशिशों के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इजरायल के एक बड़े हमले के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों से ‘टोल’ वसूलना शुरू कर दिया है। मिडिल ईस्ट युद्ध का भारत पर असर अब सीधा देखने को मिल रहा है—रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया है और सरकार को आम आदमी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बदलनी पड़ रही है।
कतर में LNG उत्पादन रुकने के बाद वैश्विक हीलियम बाजार में तेज हलचल शुरू हो गई है। हर महीने करीब 50 लाख क्यूबिक मीटर हीलियम सप्लाई घटने का असर अब ऊर्जा कारोबार से आगे बढ़कर चिप उद्योग, अस्पतालों और एयरोस्पेस सेक्टर तक महसूस किया जा रहा है। यह संकट दिखाता है कि दुनिया की कई अहम इंडस्ट्री कितनी नाजुक और आपस में जुड़ी हुई सप्लाई चेन पर टिकी हैं।
जब खाड़ी देशों (Gulf) में तनाव बढ़ता है, तो पानी का एक बेहद संकरा गलियारा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था का ‘प्राइसिंग इंजन’ बन जाता है। यह कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुँचा देता है, वैश्विक शिपिंग के रास्ते बदल देता है और कूटनीति की सबसे कठिन परीक्षा लेता है।
15 मार्च 2026 | By Abhishek Kumar आधुनिक युद्ध की एक सच्चाई है—बड़ी मिसाइलें और लड़ाकू विमान तभी काम आते हैं, जब उन्हें सही जगह तक पहुंचाने की ताकत हो। और यही काम करते हैं मिलिट्री ट्रक। आज भारत में यह ताकत तेजी से बदल रही है, और इसकी असली कहानी झारखंड के जमशेदपुर से … Read more