काकेशस का शतरंज: आर्मेनिया को हथियार देकर ‘तुर्की-पाक-अज़रबैजान’ की तिकड़ी को कैसे तोड़ रहा है भारत?

नई दिल्ली/येरेवान। भारत-आर्मेनिया रक्षा डील। दुनिया का ध्यान जब रूस-यूक्रेन या इज़रायल-हमास युद्ध पर है, तब भारत से करीब 4000 किलोमीटर दूर ‘काकेशस’ (Caucasus) की पहाड़ियों में एक बहुत बड़ा भू-राजनीतिक (Geopolitical) खेल चल रहा है।

इस इलाके में दो छोटे देश हैं— आर्मेनिया और अज़रबैजान। दोनों के बीच दशकों से नागोर्नो-काराबाख (Nagorno-Karabakh) नाम के इलाके को लेकर खूनी संघर्ष चल रहा है। 2020 की जंग में अज़रबैजान ने आर्मेनिया को बुरी तरह हरा दिया था। अज़रबैजान की इस जीत के पीछे उसके दो खास दोस्त थे— तुर्की और पाकिस्तान।

इस हार के बाद आर्मेनिया ने मदद के लिए रूस की तरफ देखा, लेकिन रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा था। ऐसे में जब आर्मेनिया पूरी तरह अकेला पड़ गया, तब उसकी ढाल बनकर सामने आया— भारत

आज भारत आर्मेनिया को अपने सबसे आधुनिक हथियार (पिनाका रॉकेट, आकाश मिसाइल और आर्टिलरी गन) दे रहा है। लेकिन सवाल यह है कि भारत ऐसा क्यों कर रहा है? क्या यह सिर्फ हथियारों का व्यापार है? नहीं, यह कूटनीति की बिसात पर भारत का एक ऐसा ‘मास्टरस्ट्रोक’ है, जिसने सीधे तौर पर कश्मीर में दखल देने वाले ‘तुर्की-पाकिस्तान-अज़रबैजान’ गठजोड़ की कमर तोड़ दी है।

आइए, आसान भाषा में समझते हैं भारत के इस बड़े रणनीतिक दांव को:

दुनिया में एक नया इस्लामिक गठजोड़ बन रहा है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन खुद को मुस्लिम दुनिया का नया खलीफा बनाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने पाकिस्तान और अज़रबैजान के साथ मिलकर एक 'थ्री ब्रदर्स' (Three Brothers) यानी 'तीन भाइयों' का सैन्य गठबंधन बनाया है।
‘थ्री ब्रदर्स’ की धुरी: आर्मेनिया पर सैन्य हमला और कश्मीर पर भारत का कूटनीतिक विरोध… जानिए काकेशस में कैसे काम करती है यह इस्लामिक तिकड़ी।

1. आखिर क्या है ‘तुर्की-पाक-अज़रबैजान’ की धुरी (Axis)?

दुनिया में एक नया इस्लामिक गठजोड़ बन रहा है। तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन खुद को मुस्लिम दुनिया का नया खलीफा बनाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने पाकिस्तान और अज़रबैजान के साथ मिलकर एक ‘थ्री ब्रदर्स’ (Three Brothers) यानी ‘तीन भाइयों’ का सैन्य गठबंधन बनाया है।

पाकिस्तान की दुश्मनी: पाकिस्तान दुनिया का इकलौता देश है, जो आर्मेनिया को एक देश के रूप में मान्यता ही नहीं देता।

तुर्की का स्वार्थ: तुर्की अज़रबैजान का कट्टर समर्थक है और उसे अपने खतरनाक ‘बायरकतार टीबी2’ (Bayraktar TB2) ड्रोन्स देता है।

भारत के खिलाफ साज़िश: अज़रबैजान और तुर्की, दोनों अंतरराष्ट्रीय मंचों (जैसे UN) पर कश्मीर मुद्दे पर खुलकर पाकिस्तान का साथ देते हैं। 2020 में जब अज़रबैजान और आर्मेनिया की जंग हुई, तो रिपोर्ट्स आईं कि पाकिस्तानी सेना और आतंकी अज़रबैजान की तरफ से लड़ने के लिए वहां गए थे।

यानी, यह तिकड़ी न केवल काकेशस में आतंक मचा रही थी, बल्कि भारत के आंतरिक मामलों (कश्मीर) में भी जहर घोल रही थी।

2. भारत-आर्मेनिया रक्षा डील: ईंट का जवाब पत्थर से

पहले का भारत ऐसे मामलों में सिर्फ ‘कड़ी निंदा’ वाले बयान जारी करता था। लेकिन आज का भारत अलग है। भारत ने तय किया कि अगर तुर्की और अज़रबैजान हमारे कश्मीर में दखल देंगे, तो भारत सीधे उनके ‘बैकयार्ड’ (पिछवाड़े) यानी काकेशस में घुसकर उन्हें जवाब देगा।

भारत ने आर्मेनिया के साथ करोड़ों डॉलर की रक्षा डील की। 2022 से लेकर अब तक भारत ने आर्मेनिया को हथियारों का ऐसा जखीरा दिया है, जिसने अज़रबैजान की रातों की नींद उड़ा दी है:

भारत ने आर्मेनिया के साथ करोड़ों डॉलर की रक्षा डील की। 2022 से लेकर अब तक भारत ने आर्मेनिया को हथियारों का ऐसा जखीरा दिया है, जिसने अज़रबैजान की रातों की नींद उड़ा दी है:
भारत ने आर्मेनिया को वही हथियार दिए हैं, जो सीधे तौर पर तुर्की और पाकिस्तान की रणनीति को फेल कर सकें
  • पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (Pinaka MBRL): यह भारत का ‘ब्रह्मास्त्र’ है। यह 44 सेकंड में 72 रॉकेट दागकर दुश्मन के पूरे इलाके को तबाह कर सकता है। आर्मेनिया दुनिया का पहला देश बना जिसे भारत ने पिनाका बेचा है।
  • स्वाती वेपन लोकेटिंग रडार (Swathi Radar): अज़रबैजान छुपकर तोप के गोले दागता था। स्वाती रडार तुरंत बता देता है कि गोला कहां से दागा गया है, ताकि आर्मेनिया तुरंत पलटवार कर सके।
  • आकाश एयर डिफेंस सिस्टम: अज़रबैजान की सबसे बड़ी ताकत उसके तुर्की वाले ड्रोन थे। भारत का आकाश मिसाइल सिस्टम इन ड्रोन्स को हवा में ही मार गिराने में सक्षम है।
  • ATAGS (आर्टिलरी गन): भारत की स्वदेशी तोपें, जो पहाड़ों पर सटीक निशाना लगाने में माहिर हैं, वे भी आर्मेनिया पहुंच चुकी हैं।

सिर्फ बदला नहीं, एक बहुत बड़ा ‘इकोनॉमिक मास्टरप्लान’ भी है

अगर आपको लग रहा है कि भारत यह सब सिर्फ पाकिस्तान और तुर्की को चिढ़ाने के लिए कर रहा है, तो रुकिए। इसके पीछे भारत का खरबों डॉलर का व्यापारिक हित भी छिपा है।

भारत 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) नाम का एक बहुत बड़ा ट्रेड रूट बना रहा है
इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर के जरिए भारत का बड़ा गेम

भारत ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) नाम का एक बहुत बड़ा ट्रेड रूट बना रहा है। आसान शब्दों में समझें तो: भारत का सामान पानी के जहाज से ईरान (चाबहार पोर्ट) जाता है। वहां से सड़क/ट्रेन के रास्ते आर्मेनिया होते हुए रूस और फिर यूरोप तक पहुंचता है। यह रास्ता स्वेज नहर वाले रास्ते से 40% छोटा और 30% सस्ता है।

अज़रबैजान की साज़िश: अज़रबैजान और तुर्की एक ‘ज़ांगेज़ुर कॉरिडोर’ (Zangezur Corridor) बनाना चाहते हैं। अगर यह कॉरिडोर बन गया, तो यह आर्मेनिया के दक्षिणी हिस्से को काटकर ईरान और आर्मेनिया का बॉर्डर खत्म कर देगा। अगर ऐसा हुआ, तो भारत का ईरान से आर्मेनिया जाने वाला रास्ता हमेशा के लिए बंद हो जाएगा और भारत का INSTC प्रोजेक्ट फेल हो जाएगा। भारत के व्यापार पर तुर्की और अज़रबैजान का कंट्रोल हो जाएगा।

इसलिए, आर्मेनिया को बचाना भारत के लिए सिर्फ कूटनीति नहीं, बल्कि अपनी ‘आर्थिक जीवनरेखा’ (Economic Lifeline) को बचाने की मजबूरी भी है। भारत आर्मेनिया को मजबूत करके यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी उसके ट्रेड रूट पर कब्ज़ा न कर सके।

4. भारतीय हथियारों का ‘ग्लोबल शोकेस’

इस पूरी जियोपॉलिटिक्स में भारत के रक्षा उद्योग (Defense Industry) की भी चांदी हो रही है। दशकों तक भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार ‘खरीदने’ वाला देश रहा है। लेकिन अब भारत हथियार ‘बेचने’ वाला देश बन रहा है।

काकेशस की पहाड़ियां दुनिया के लिए एक ‘टेस्टिंग लैब’ की तरह हैं। जब फ्रांस, अमेरिका और रूस जैसे देशों की नज़र आर्मेनिया-अज़रबैजान सीमा पर होगी, तब वे देखेंगे कि भारत का ‘पिनाका’ और ‘आकाश’ सिस्टम कितना खतरनाक है।

अगर भारतीय हथियारों ने तुर्की के ड्रोन्स और अज़रबैजान की सेना को रोक दिया, तो पूरी दुनिया (खासकर ग्लोबल साउथ के देश) भारत से हथियार खरीदने लाइन में लग जाएगी। आर्मेनिया एक तरह से भारतीय हथियारों का ‘पोस्टर बॉय’ बन गया है।

निष्कर्ष: ‘सॉफ्ट पावर’ से ‘हार्ड पावर’ बनता भारत

काकेशस में भारत की यह चाल बताती है कि नई दिल्ली की सोच अब कितनी आक्रामक और रणनीतिक हो चुकी है। भारत ने बिना एक भी सैनिक भेजे, बिना कोई युद्ध लड़े, सिर्फ अपनी रक्षा कूटनीति (Defense Diplomacy) के दम पर तीन बड़े काम कर दिए हैं:

  1. कश्मीर में दखल देने वाले पाकिस्तान और तुर्की को उनके ही इलाके में घेर लिया।
  2. अपने अरबों डॉलर के ट्रेड रूट (INSTC) को सुरक्षित कर लिया।
  3. दुनिया को बता दिया कि भारतीय हथियार पश्चिमी देशों के हथियारों से कम नहीं हैं।

आर्मेनिया आज खुलेआम कहता है कि भारत उसका सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार है। कूटनीति की भाषा में कहें तो भारत ने ‘काकेशस के शतरंज’ में अज़रबैजान के प्यादों और तुर्की के वज़ीर को अपने ‘पिनाका’ नाम के घोड़े से सीधा चेकमेट दे दिया है।

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