क्या नाटो टूटने वाला है?

NATO Trump Tension: क्या नाटो टूटने वाला है?
महाकवरेज / EXPLAINER

ईरान युद्ध पर भड़के ट्रंप! क्या नाटो (NATO) से बाहर निकलेगा अमेरिका? यूरोप में मची खलबली

ईरान युद्ध की आग ने नाटो (NATO) और डोनाल्ड ट्रंप के बीच अब तक की सबसे बड़ी दरार पैदा कर दी है। ट्रंप ने खुली धमकी दी है। जानिए कैसे अमेरिका का नाटो से हटना दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की तरफ धकेल सकता है।

साल 2026 में अमेरिका और नाटो (NATO) के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच चुका है। ईरान में भड़के भीषण युद्ध और रक्षा बजट को लेकर पुरानी खींचतान ने दुनिया के सबसे बड़े सैन्य गठबंधन को टूटने की कगार पर ला खड़ा किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए नाटो सिर्फ एक व्यापारिक सौदा है— अगर मुसीबत में यूरोप अमेरिका का साथ नहीं दे सकता, तो ट्रंप के लिए इस गठबंधन का कोई मतलब नहीं। और फिलहाल, यूरोप इस वफादारी के टेस्ट में बुरी तरह फेल हो रहा है।

ईरान युद्ध ने सुलगाई चिंगारी: ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’

फरवरी 2026 के अंत में जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर विनाशकारी “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” शुरू किया, तो पूरी दुनिया सहम गई। इस युद्ध के कारण दुनिया की सबसे अहम समुद्री सीमा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद हो गई। चंद घंटों के भीतर ग्लोबल ऑयल मार्केट (Global Oil Markets) में हाहाकार मच गया।

ट्रंप ने तुरंत नाटो देशों से अपने नेवी जहाज भेजने और सैन्य बेस इस्तेमाल करने की मांग की। लेकिन खौफ में जी रहे यूरोपीय देशों ने अपने हाथ खड़े कर दिए। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने तो अपना एयरस्पेस ही बंद कर दिया!

गद्दारी के इस अहसास ने ट्रंप को आगबबूला कर दिया। उन्होंने खुलेआम नाटो को “कागजी शेर” (Paper Tiger) और यूरोपीय नेताओं को “कायर” कह डाला। व्हाइट हाउस के सूत्रों की मानें तो ट्रंप सजा के तौर पर स्पेन जैसे देशों से 70,000 अमेरिकी सैनिकों को रातों-रात निकालने की खौफनाक योजना बना रहे हैं।

व्हाइट हाउस में हाई-वोल्टेज ड्रामा

आग बुझाने की आखिरी कोशिश में 8 अप्रैल, 2026 को नाटो महासचिव मार्क रुटे दौड़ते हुए व्हाइट हाउस पहुंचे। लेकिन वहां उन्हें सिर्फ जलालत मिली।

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी ने इस मुलाकात को तीखी बहस करार देते हुए कहा कि सहयोगियों ने अमेरिका की “पीठ में छुरा घोंपा” है। ट्रंप की जिद अब और बड़ी हो गई है— वो अब जीडीपी का 2% नहीं, बल्कि 5% रक्षा बजट मांग रहे हैं। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि मुश्किल वक्त में पीठ दिखाने वाले यूरोप को “अमेरिका कभी माफ नहीं करेगा।”

क्या सच में नाटो छोड़ देंगे ट्रंप? क्या कहता है कानून?

पूरी दुनिया सांसें थाम कर यह सोच रही है कि क्या अमेरिका सच में नाटो से बाहर आ जाएगा? तकनीकी तौर पर यह आसान नहीं है, लेकिन नामुमकिन भी नहीं।

कानूनी बाधा: दिसंबर 2023 में अमेरिकी संसद ने एक सख्त कानून (NDAA 2024) पास किया था। इसके तहत कोई भी राष्ट्रपति सीनेट के दो-तिहाई बहुमत के बिना नाटो से बाहर नहीं निकल सकता। इसे ट्रंप को रोकने के लिए ही बनाया गया था।

ट्रंप का ‘ब्रह्मास्त्र’ (Presidential Loophole): ट्रंप आसानी से हार मानने वालों में से नहीं हैं। वे विदेशी संधियों पर ‘राष्ट्रपति के विशेषाधिकार’ का दावा कर इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। 1978 में जब राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने बिना सीनेट से पूछे ताइवान के साथ रक्षा संधि तोड़ी थी, तो गोल्डवॉटर बनाम कार्टर (Goldwater v. Carter) केस में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति को नहीं रोका था।

अगर ट्रंप ने यह दांव चला और नाटो को एक साल का एग्जिट नोटिस थमा दिया, तो यह अमेरिका के इतिहास का सबसे भयानक संवैधानिक संकट (Constitutional Crisis) होगा।

आगे क्या? हेग समिट 2026 पर टिकी दुनिया की नजरें

अमेरिका के बिना यूरोप पूरी तरह से अनाथ हो जाएगा। खुद को बचाने की छटपटाहट में यूरोप की नजरें अब 2026 के हेग नाटो समिट पर टिकी हैं। यहां यूरोप ट्रंप को मनाने के लिए कुछ कड़े फैसले लेने को मजबूर है:

  • 5% का अल्टीमेटम: सहयोगी देशों पर रक्षा खर्च को जीडीपी के 5% तक ले जाने का भारी दबाव होगा।
  • यूरोपीय सेना की तैयारी: यूरोप 2032 तक नाटो की 70% सैन्य ताकत खुद खड़ी करने की योजना बना रहा है, ताकि अमेरिका पर निर्भरता कम हो।
  • ईरान पर बीच का रास्ता: युद्ध में कूदे बिना, ट्रंप को खुश करने के लिए नौसैनिक रास्तों की सुरक्षा का कोई नया फॉर्मूला ढूँढना।

तीसरे विश्व युद्ध की आहट?

ट्रंप और नाटो के बीच की यह कड़वाहट कम होने का नाम नहीं ले रही है। ट्रंप आए दिन सोशल मीडिया पर यूरोप को ताने मार रहे हैं। उन्होंने हाल ही में ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा: “जब हमें जरूरत थी, नाटो वहां नहीं था… ग्रीनलैंड को याद रखना।”

एक तरफ मध्य-पूर्व में ईरान युद्ध की लपटें हैं, और दूसरी तरफ रूस के लगातार बढ़ते हमले का खौफ। अगर अमेरिका ने सच में नाटो का हाथ छोड़ दिया, तो यह सिर्फ एक गठबंधन का टूटना नहीं होगा, बल्कि पूरी दुनिया को एक महायुद्ध की आग में झोंकने की शुरुआत होगी।

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