ईरान-अमेरिका तनाव में पाकिस्तान की मध्यस्थता कितनी असली, भारत क्यों दूर है
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता कितनी असली है? जानिए भारत क्यों दूरी बनाए हुए है, चाबहार, हॉर्मुज और ऊर्जा सुरक्षा पर इसके क्या मायने हैं।
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता कितनी असली है? जानिए भारत क्यों दूरी बनाए हुए है, चाबहार, हॉर्मुज और ऊर्जा सुरक्षा पर इसके क्या मायने हैं।
विश्लेषण | The Eastern Strategist Desk पढ़ने का समय: 4 मिनट जब दुनिया ईरान में भड़क रहे युद्ध को सिर्फ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पेट्रोल पंप के मीटर के नजरिए से देख रही है, भारत के लिए यह कहानी कहीं ज्यादा गहरी और बड़ी है। यह सिर्फ ऊर्जा का झटका नहीं है। भू-राजनीति … Read more
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के नाकाम होने के बाद क्या अब अमेरिका ईरान में अपनी सेना उतारने जा रहा है? खार्ग द्वीप पर कब्जे की तैयारी और ज़ाग्रोस पहाड़ों के अभेद्य किलों के बीच, वॉशिंगटन एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसता दिख रहा है जहां से निकलना नामुमकिन हो सकता है। जानिए क्यों यह जमीनी हमला अमेरिका के लिए एक रणनीतिक ‘नर्क’ साबित हो सकता है।
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 94 के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार पहुंच गया है। टीवी चैनलों और अखबारों की हेडलाइंस देखकर ऐसा लग रहा है कि इसकी मुख्य वजह 100 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुका कच्चा तेल (Crude Oil) और ईरान का युद्ध है।
संक्षिप्त सार: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की कोशिशों के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इजरायल के एक बड़े हमले के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों से ‘टोल’ वसूलना शुरू कर दिया है। मिडिल ईस्ट युद्ध का भारत पर असर अब सीधा देखने को मिल रहा है—रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया है और सरकार को आम आदमी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बदलनी पड़ रही है।
कतर में LNG उत्पादन रुकने के बाद वैश्विक हीलियम बाजार में तेज हलचल शुरू हो गई है। हर महीने करीब 50 लाख क्यूबिक मीटर हीलियम सप्लाई घटने का असर अब ऊर्जा कारोबार से आगे बढ़कर चिप उद्योग, अस्पतालों और एयरोस्पेस सेक्टर तक महसूस किया जा रहा है। यह संकट दिखाता है कि दुनिया की कई अहम इंडस्ट्री कितनी नाजुक और आपस में जुड़ी हुई सप्लाई चेन पर टिकी हैं।
जब खाड़ी देशों (Gulf) में तनाव बढ़ता है, तो पानी का एक बेहद संकरा गलियारा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था का ‘प्राइसिंग इंजन’ बन जाता है। यह कच्चे तेल की कीमतों को आसमान पर पहुँचा देता है, वैश्विक शिपिंग के रास्ते बदल देता है और कूटनीति की सबसे कठिन परीक्षा लेता है।
15 मार्च 2026 | By Abhishek Kumar आधुनिक युद्ध की एक सच्चाई है—बड़ी मिसाइलें और लड़ाकू विमान तभी काम आते हैं, जब उन्हें सही जगह तक पहुंचाने की ताकत हो। और यही काम करते हैं मिलिट्री ट्रक। आज भारत में यह ताकत तेजी से बदल रही है, और इसकी असली कहानी झारखंड के जमशेदपुर से … Read more
अक्सर निवेशक युद्ध के दौरान केवल उन चेहरों को देखते हैं जो सबसे ज्यादा चमकते हैं—जैसे कच्चे तेल की कीमतें, लड़ाकू विमान बनाने वाली कंपनियाँ या कूटनीतिक हलचलें। लेकिन आधुनिक संघर्षों का एक ‘अदृश्य सच’ भी है। युद्ध केवल हेडलाइन्स से नहीं जीते जाते, बल्कि वे गोलों (Shells), प्रणोदकों (Propellants), रॉकेट मोटरों और विस्फोटकों की उस औद्योगिक क्षमता पर टिके होते हैं, जो दुनिया भर में मांग बढ़ने पर अक्सर कम पड़ जाती है।
इजराइल के नेगेव रेगिस्तान की उस भीषण खामोशी में, मृत सागर (Dead Sea) से लगभग 35 किलोमीटर पश्चिम में एक ऐसा शहर बसा है जिसकी कल्पना करना भी कठिन है। इस शहर का नाम है ‘डिमोना’। यहाँ की धूल भरी गलियों में आज भी हिब्रू के बीच मराठी के शब्द तैरते सुनाई देते हैं। तपती दोपहरों में जब खिड़कियों से घर में बने भारतीय मसालों की खुशबू आती है, तो रेगिस्तान का सन्नाटा जैसे किसी भारतीय कस्बे में तब्दील हो जाता है। यह इजराइल का ‘छोटा भारत’ है—’बेने इजराइल’ (Bene Israel) समुदाय का वह आशियाना, जिसकी दास्ताँ सदियों, महाद्वीपों और अब एक सीधे युद्ध के बीच से गुजर रही है।