“ईरान का ‘टोल’ और धड़ाम हुआ रुपया: मिडिल ईस्ट की जंग से आपकी रसोई तक कैसे पहुँची आग?

कच्चा तेल, होर्मुज का ‘टोल’ और गिरता रुपया: मिडिल ईस्ट युद्ध का भारत पर असर

कच्चा तेल, होर्मुज का ‘टोल’ और गिरता रुपया: मिडिल ईस्ट युद्ध का भारत पर असर

संक्षिप्त सार: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की कोशिशों के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इजरायल के एक बड़े हमले के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों से ‘टोल’ वसूलना शुरू कर दिया है। मिडिल ईस्ट युद्ध का भारत पर असर अब सीधा देखने को मिल रहा है—रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गया है और सरकार को आम आदमी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बदलनी पड़ रही है।

कूटनीति और युद्ध का ‘डबल गेम’

पिछले लगभग एक महीने से पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे युद्ध ने अब एक अजीब मोड़ ले लिया है। एक तरफ अमेरिका पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव भेज रहा है, तो दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रम्प ने खुलेआम कह दिया है कि “सीजफायर का कोई प्लान नहीं है” और ईरान को चेतावनी दी है कि समय रहते वो गंभीर हो जाए।

मैदान पर लड़ाई लगातार तेज हो रही है। इजरायल ने एक सटीक एयरस्ट्राइक में ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) नेवी के कमांडर एडमिरल अलीरेजा तंगसिरी को मार गिराया है। तंगसिरी वही रणनीतिकार थे जिन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी का पूरा प्लान बनाया था।

ईरान का पलटवार: इसके जवाब में ईरान ने दुनिया के सबसे अहम ऑयल रूट—होर्मुज जलडमरूमध्य—पर एक ‘टोल सिस्टम’ लागू कर दिया है। अब वहां से गुजरने वाले जहाजों को कागजात दिखाने होंगे, क्लीयरेंस कोड लेना होगा और IRGC की निगरानी में गुजरना होगा। आसान भाषा में कहें तो ईरान ने इस रास्ते को अपनी कमाई और दुनिया पर दबाव बनाने का हथियार बना लिया है।

[यहाँ होर्मुज जलडमरूमध्य और ग्लोबल शिपिंग रूट को दर्शाने वाली इमेज लगाएं – Alt text: “Strait of Hormuz map showing global oil shipping routes”]

अमेरिका की 15-सूत्रीय शांति योजना में क्या है?

पाकिस्तान के जरिए जो प्रस्ताव ईरान तक पहुंचा है, सूत्रों के मुताबिक उसमें मुख्य रूप से ये 4 बातें शामिल हैं:

  • मिसाइल और ड्रोन हमलों पर चरणबद्ध तरीके से रोक।
  • ईरान के यूरेनियम संवर्धन (Uranium enrichment) पर लिमिट लगाना।
  • शांति की ओर कदम बढ़ाने पर ईरान पर लगे प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील देना।
  • होर्मुज में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना।

हालांकि, ईरान ने इसे एकतरफा बताया है और युद्ध के मुआवजे सहित अपनी 5 क्रॉस-शर्तें रख दी हैं।

बाजार में उथल-पुथल: रुपया धड़ाम, चांदी चमकी

इन सब का सीधा असर ग्लोबल इकॉनमी पर हो रहा है। युद्ध की वजह से ग्लोबल कच्चे तेल (Brent Crude) के दाम $120 के पार चले गए थे, लेकिन अब यह थोड़ा संभलकर $103 प्रति बैरल के आसपास आ गया है।

मिडिल ईस्ट युद्ध का भारत पर असर यह हुआ है कि भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर ₹94.1 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है।

कमोडिटी मार्केट का अजीब खेल: बाजार में एक बहुत ही अजीब पैटर्न देखने को मिला है। चांदी की कीमतों में 5% का उछाल आया है, लेकिन जो ‘सोना’ संकट के समय सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता है, वह गिरकर $4,350 प्रति औंस पर आ गया है। इसे इकॉनमी की भाषा में ‘लिक्विडिटी क्रंच’ (नकदी का संकट) कहते हैं। जब बड़े संस्थानों को कैश की सख्त जरूरत होती है, तो वे मजबूरी में अपना सोना बेचकर पैसा जुटाते हैं।

भारत की तैयारी: क्या आपकी रसोई की गैस महंगी होगी?

अब सबसे बड़ा सवाल—क्या होर्मुज का रास्ता बाधित होने से हमारी रसोई का बजट बिगड़ेगा? पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि भारत के पास अभी 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक तेल भंडार मौजूद है, जो जमीन के नीचे बनी विशाल गुफाओं (Caverns) में सुरक्षित है।

रही बात रसोई गैस की, तो जो लोग पाइपलाइन वाली गैस (PNG) का इस्तेमाल करते हैं, वे LPG सिलेंडर वालों के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित हैं, क्योंकि भारत में पीएनजी की लगभग आधी सप्लाई हमारे अपने घरेलू स्रोतों से ही हो जाती है。

भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी सरकार ने 2035 के अपने क्लाइमेट टारगेट (NDC) घोषित किए हैं, जिसमें कार्बन उत्सर्जन को 47% तक कम करना और 60% बिजली गैर-जीवाश्म (Non-fossil) स्रोतों से बनाना शामिल है।

ग्लोबल इम्पैक्ट और इजरायल का ‘मिनी इंडिया’

इस युद्ध की आंच केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है। ब्रिटेन का रक्षा बजट इस समय £28 बिलियन के घाटे में चल रहा है और उनके रक्षा प्रणालियों में भारी खामियां सामने आई हैं। नाटो (NATO) देशों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं।

वहीं, इस पूरी भू-राजनीति के बीच एक बहुत ही भावुक मानवीय पहलू भी है। जब ईरान की मिसाइलें इजरायल के ‘डिमोना’ शहर के पास गिरीं, तो इसने वहां बसे ‘बेने इजरायल’ समुदाय को झकझोर कर रख दिया। डिमोना को इजरायल का ‘लिटिल इंडिया’ कहा जाता है, जहां महाराष्ट्र से जाकर बसे उन यहूदियों की बड़ी आबादी रहती है, जो आज भी वहां भारतीय परंपराओं को जिंदा रखे हुए हैं।

द ईस्टर्न स्ट्रैटेजिस्ट (The Eastern Strategist) विशेष रिपोर्ट

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