महायुद्ध या महा-शांति? ट्रंप के 48 घंटे के ‘अल्टीमेटम’ से कांपा मिडिल ईस्ट! जानिए 45 दिन के सीजफायर का पूरा सच
वाशिंगटन/तेहरान: क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़ी है? या फिर विनाश के इस खौफनाक दरवाजे से कोई कूटनीतिक रास्ता निकलेगा? घड़ियां टिक-टिक कर रही हैं और पूरी दुनिया की सांसें अटकी हुई हैं! राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को दी गई डेडलाइन (मंगलवार, 8 अप्रैल, रात 8 बजे ET) खत्म होने में अब 48 घंटे से भी कम समय बचा है! इस बारूदी ढेर के बीच कूटनीतिक गलियारों से एक बड़ी और एक्सक्लूसिव खबर सामने आ रही है—अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों के बीच एक 45 दिवसीय सीजफायर (Ceasefire) पर गुप्त और बेहद तेज बातचीत चल रही है।
यह सिर्फ एक युद्धविराम की कोशिश नहीं है, यह मिडिल ईस्ट को राख होने से बचाने की आखिरी जद्दोजहद है!
क्या है 45 दिन का ‘टू-फेज’ मास्टरप्लान?
यह कोई आम समझौता नहीं है। यह विनाश को टालने का एक ‘टू-फेज’ (Two-phased) मास्टरप्लान है। पहले चरण में 45 दिनों के लिए सभी मोर्चों पर हथियारों को शांत रखा जाएगा। इस ‘कूलिंग पीरियड’ के दौरान दूसरे चरण की बातचीत होगी, जिसमें हॉर्मुज जलडमरूमध्य, ईरान के परमाणु भंडार और क्षेत्रीय प्रॉक्सी गुटों पर कोई स्थायी ‘डील’ की जाएगी। अगर यह प्लान फेल हुआ, तो अमेरिका ने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर ‘विनाशकारी प्रहार’ की खुली चेतावनी दे रखी है!
ट्रंप का 15-सूत्रीय ‘सरेंडर ड्राफ्ट’!
अमेरिकी रणनीतिकारों ने ईरान के सामने जो 15-सूत्रीय मांग पत्र रखा है, वह किसी सरेंडर डॉक्यूमेंट से कम नहीं है! अमेरिका की शर्तें दो-टूक हैं:
- परमाणु शटर-डाउन: नतांज, इस्फ़हान और फोर्डो के परमाणु केंद्रों पर तुरंत ताला लगाया जाए।
- यूरेनियम सरेंडर: संवर्धित यूरेनियम का एक-एक कतरा अंतरराष्ट्रीय एजेंसी (IAEA) को सौंपा जाए।
- मिसाइलों पर ब्रेक: ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों की रेंज सिर्फ आत्मरक्षा तक सीमित हो।
- हॉर्मुज को खोलना: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बिना शर्त खोलना होगा।
ईरान की ढिठाई और 5-सूत्रीय ‘अहंकार’
तेहरान ने अमेरिका के इस अल्टीमेटम को ‘युद्ध अपराध’ बताते हुए कूड़ेदान में डाल दिया है। पलटवार करते हुए ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अपना काउंटर-प्रपोजल टेबल पर पटक दिया है:
- अमेरिका और इजरायल तुरंत अपने सभी हमले बंद करें।
- ईरान को इस युद्ध से हुए नुकसान का पूरा हर्जाना (Reparations) दिया जाए!
- भविष्य में हमले न होने की ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी मिले।
आर्थिक प्रभाव (Global Impact)
अगर यह बातचीत फेल होती है और युद्ध भड़कता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन टूटेगी और कच्चे तेल (Crude Oil) के दाम आसमान फाड़ देंगे, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।